NSE share price : IPO में चूक गए, अब क्या करें निवेशक? ब्रोकरेज ने बताया अभी एंट्री लेने पर कितना हो सकता है मुनाफा?
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NSE Share Price: नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के IPO में निवेश का मौका चूक गए निवेशकों को क्या अब इसमें निवेश का इरादा छोड़ देना चाहिए या अभी भी इसमें मुनाफे का कोई मौका बचा है। अगर कोई निवेशक मौजूदा भाव पर शेयर में एंट्री लेता है, तो यह कितना फायदेमंद हो सकता है? PL Capital ने अपनी नई रिपोर्ट में NSE पर कवरेज शुरू करते हुए शेयर के लिए 1,950 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है। ब्रोकरेज ने इसे 'Accumulate' रेटिंग दी है। रिपोर्ट में दिए गए मौजूदा भाव 1,785 रुपये के मुकाबले यह करीब 9.2 फीसदी की संभावित तेजी दिखाता है।
1,950 रुपये तक जा सकता है NSE का शेयर
PL Capital के मुताबिक, NSE का कारोबार मजबूत बाजार हिस्सेदारी और कई आय स्रोतों पर आधारित है। शेयर बाजार के कैश सेगमेंट में इसकी हिस्सेदारी करीब 93 फीसदी है, जबकि स्टॉक और इंडेक्स फ्यूचर्स में यह लगभग पूरे बाजार पर पकड़ रखता है। हालांकि, इंडेक्स ऑप्शंस में इसकी हिस्सेदारी घटी है। FY24 में करीब 97 फीसदी रही हिस्सेदारी FY26 में 72 फीसदी और FY27 में अब तक करीब 65 फीसदी रह गई है।
ब्रोकरेज ने NSE के लिए 1,950 रुपये का टारगेट प्राइस FY29 की अनुमानित कमाई के 35 गुना मूल्यांकन के आधार पर तय किया है। 1,785 रुपये के भाव पर निवेश करने वाले निवेशकों को इस टारगेट तक पहुंचने पर करीब 165 रुपये प्रति शेयर का संभावित फायदा हो सकता है। हालांकि, यह ब्रोकरेज का अनुमान है, इसकी गारंटी नहीं।
कमाई बढ़ेगी, लेकिन रफ्तार पर दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, NSE की परिचालन आय FY21 से FY26 के बीच 25 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ी। लेकिन अगले तीन वर्षों यानी FY26 से FY29 के दौरान इसके करीब 11 फीसदी की दर से बढ़ने का अनुमान है। इसकी बड़ी वजह इंडेक्स ऑप्शंस में घटती बाजार हिस्सेदारी और रेगुलेटरी बदलावों का असर है।
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वहीं, NSE के लिए राहत की बात यह है कि लिस्टिंग सेवाओं, को-लोकेशन, डेटा फीड और इंडेक्स लाइसेंसिंग जैसे कारोबार तेजी से बढ़ सकते हैं। PL Capital को इन कारोबारों से FY26 से FY29 के बीच 14 फीसदी की सालाना वृद्धि की उम्मीद है।
निवेश से पहले इन जोखिमों पर भी नजर
ब्रोकरेज का अनुमान है कि NSE का मुनाफा FY26 से FY29 के बीच सालाना करीब 11 फीसदी बढ़ सकता है। साथ ही, एकमुश्त खर्चों का असर कम होने से EBITDA मार्जिन FY26 के 71.3 फीसदी से बढ़कर FY29 में 76.3 फीसदी तक पहुंच सकता है।
हालांकि, बाजार में ट्रेडिंग वॉल्यूम घटने, नियामकीय बदलावों और इंडेक्स ऑप्शंस में प्रतिस्पर्धा बढ़ने से कंपनी की कमाई प्रभावित हो सकती है। ऐसे में निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे केवल टारगेट प्राइस के आधार पर फैसला न लें, बल्कि कंपनी की कमाई, शेयर के मूल्यांकन और जोखिमों को भी ध्यान में रखें।
Disclaimer: शेयर पर निवेश को लेकर सलाह ब्रोकरेज हाउस के द्वारा दी गई हैं। यह ET NOW Swadesh के निजी विचार नहीं हैं। ET NOW Swadesh अपने पाठकों और दर्शकों को पैसों से जुड़ा कोई भी फैसला लेने से पहले अपने वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव देता है।